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Showing posts from 2017

खत्म होती रिश्तों की मर्यादा

आज रिश्तों की मर्यादा खत्म होती जा रही है| लोगो की इसी सोच के कारण अपनो पर भी विश्वास करना बहुत कठिन हो गया है|आज के दौर में लोगों की हरकतों से ये समाज भी बहुत शर्मसार हो गया है ऐसा लगता है कि कलयुग सर चढ़ कर नाच रहा है बच्चा जब बोलने लगता है तो उसे रिश्तों के बारे मे बार बार बुलवाते और बताते है कि ये चाची - चाचा ,बुआ- ,दादी- बाबा, भाई - बहन इत्यादि |पर आज इन रिश्तो की कोई कद्र नही | आज लोग इतने हवसी हो गये कि अपनी बहन तक को अपनी हवस का शिकार बना डाला वो उन रिश्तों को भूल गये कि यदि समाज मे इस बात को जाना तो वह क्या जवाब देंगे | आज शायद करीब छः महीने पहले से हिम्मत कर रहा हूॅ पर आज इस पर लिखने की हिम्मत कर पाया | ये लेख पढने मे शायद  अटपटा लगे पर जो भी लिखा गया है वह एक कटु सत्य है अपने ही भाई से शायद कोई भी बहन को ये उम्मीद नही होगी | जो समाज के सामने तो भाई है पर पर्दे के पीछे हवसी कुत्ता | आज के दौर में ये सुनना और जानना बहुत ही जरूरी है | लड़की अपने बचपन के मित्र है जो अच्छे दोस्त है  और वह सिर्फ एक अच्छे दोस्त ही होते है ना कि लिव इन रिलेशनशिप मे |  वो दोनो इस रिश्ते...

विकास के नाम पर सिर्फ कंक्रीट

आज विकास का नाम सिर्फ कंकरीट पर ही आधारित हो गया है अगर काम कंकरीट का किया तो ही विकास है नही तो विकास नही मानते है लोग|आज की तारीख में विकास की परिभाषा सिर्फ और सिर्फ कंकरीट ही हो गया है जैसे रोड़े पक्की हो चाहे उसके लिए क्यो न पेड़ काटने पड़े कोई फर्क नही पड़ता है ऐसा मान कर चलने वाले लोग अगर ऐसे ही आगे बढ़ते रहे तो वो दिन दूर नही की लोग शुद्व हवा के लिए तरसने पर मजबूर होंगे  कंक्रीट पर बस रहे  शहरो का हल अब ये अपने दर्द को बयां कर रहा हसि वह पर रहने वाला कोई भी व्यकित स्वस्थ नही है इसका सबसे बड़ा कारण कृटिम वस्तुओ से परिवेश को डेवलपमेंट कर रहे है जिसके कारण शहरो का टेम्प्रेचर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है और तरह तरह की बीमारियों को दावत देता जा रहा है शाम को चलने पर आज से 6-7 पहले लखनऊ शहर की सड़कों पर चलने शीतल हवा का अनुभव सबसे अलग नजारा देता था  पर अब शाम को निकलने पर गर्म हवा मिलती है साथ ही साथ धूल भी जिसके कारण अस्थमा जैसी बीमारियां 5-6 साल के बच्चे भी ग्रसित हो गए है शहरो में अब सिर्फ कंक्रीट ही दिखाई पड़ती हर तरह पेड़ पौधे नही इसका जीत जगत उदाहरण लखनऊ का घंटाघर है कभीकरीब ...

प्रकित का विनाश करने में मुख्य कारक मनुष्य

आज जिस तरह से प्रकित का विनाश हो रहा है उसका जिम्मेदार मनुष्य ही है आज अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिये जिस तरह से प्रकित को नुकसान पहुचाया जा रहा है उसका परिणाम धीरे धीरे दिखाई पड़ने लगा है लगातार पेड़ो का कटान करके जगलो का विनाश किया जा रहा है उससे होने वाले नुकसानों को शायद मनुष्य ने अभी तक समझ ही नही पाया है जिससे उस को रोक कर प्रकित के नुकसान को रोक जा सके लगातार हो रहे जगलो के कटान के कारण जंगली जानवर बस्तियों की तरफ निकल कर बाहर आ रहे है ऐसी घटनाएं आये दिन हो रही है जिसके कारण ग्रामीण गावो में लोगो के अंदर डर बना हुआ है जगलो के कटान के कारण मौसम में तेजी से परिवर्तन हो रहा है कई  प्रकार के जीव जन्तु  पंछियों की प्रजाति विलुप्त होती जा रही है क्योंकि जीव जन्तुओं और पंछियो का घर या बसेरा जंगल मे होता है पर आज के समय मे जंगलो को बहुत तेजी से काट कर खत्म किया जा रहा है जिसके कारण ये बहुत से जीव जंतुओं और पंछियों की प्रजातिया विलुप्ति की कगार पर खड़ी है ऐसी कारण प्रकित में बहुत तेजी से बदलाव हो रहा है जिसके कारण बारिश न होने के कारण जलस्तर तेजी से गिर रहा है बुजुर्ग लोगो का मानना ...

बचपन : रह गयी बन कर यादे

वो भी क्या दिन हुआ करते थे जब हर तरफ से खुशहाली ही खुशहाली हुआ करती थी सोचने के लिए सिर्फ एक बात की आज खेलना क्या है और कौन कौन आज नही है तो उसकी कमी उस खेल में सिर्फ दिखती थी बचपन का वो जीवन कितना अच्छा होता है उस का अब सिर्फ एहसास ही बचा है वो भी क्या दिन थे जब सब मिलकर नए नए आविष्कार किया करते थे तरह तरह के खेलो के | मानो अब की तो कुछ हो ही नही पता है ना वो दोस्त रहे और न वो अब हम जिंदगी की दौड़  में  अब सब खो से गया है बचपन के जब खेल याद आते है तो बस आँखों  मे पानी आ जाता है जैसे हैम लोगो की टोली हुआ करती थी शाम होते ही सब एक जगह इक्कट्ठा होकर खेल खेलतें थे मानो समय ही काम पड़ जाता था कभी कभी में वो लड़ाई आज भी वैसी ही याद आ जाती है जब हम लोग छुपन छुपाई,क्रिकेट,कंचे ,लंबी दौड़, सियर आदि खेल हुआ लड़ते थे बचपन मे सिर्फ दो ही काम एक खेल दूजा पढ़ाई होती थी आज की तरह से जीवन मे तब कोई छह नही हुआ करती थी खेल में बेईमानी की जगह सर्वोपरि होती थी जब हारने लगो तो सिर्फ वो ही रक रास्ता अपनाते थे टी वी सीरियल की तरह लोग की आवाज निकलना दूरसे व्यक्तियों कापी करना सबसे अच्छा लगता था आज ज...

शहरो में नगर निगम की भूमिका

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भारत देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज भी वैसी ही एक बात है जैसी शायद चार पांच साल पहले थी बारिश का मौसम आने को है जिसके कारण हर साल जल भराव की  समस्या का सामना यह कि जनता को करना पड़ता है केंद्र सरकार ने गंदगी को लेकर मुहिम छेड़ी पर उसका प्रभाव लखनऊ शहर में कुछ ही समय दिखा|और उसके बाद फिर वैसा ही नजर आ रहा  है हर साल बारिश से पहले नालो की सफाई करवाई जाती है पर उससे निकलने वाला कूड़ा वही नालो के किनारे लगा कर छोड़ देते है जिसके कारण वह कूड़ा फिर से उसी नाले में चला जाता है और वह जल निकासी सही से न होने के कारण जल भराव जैसी समस्या उतपन्न होतीं है जिससे बहुत प्रकार की बीमारिया पैदा होती है आप को जान कर हैरानी  होगी की हर साल करोड़ो रूपये नगर निगम को इन नालो की सफाई में ख़र्च दिखता है पर ये नाले अपनी यथास्थित में ही रहते है इसका कारण यह है कि जब नालो को साफ किया जाता है तो उनसे निकलने वाले कूड़े को वह से हटाया नही जाता और हर साल इस पर करोड़ो का खर्च किया जाता है इसका जीता जागता उदाहरण ठाकुरगंज में नगर निगम द्बारा किया गया ये कार्य है

ऐतिहासिक पवित्र तीर्थ स्थल नैमिषारण्य

सीतापुर जिले में ऐतिहासिक पवित्र तीर्थ स्थल नैमिषारण्य दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इसे नीमसार के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि सारे धामों की यात्रा करने के बाद यदि इस धाम की यात्रा न की गई तो आपकी यात्रा अपूर्ण है। इस धाम का वर्णन पुराणों में भी पाया जाता है। नीमसार सीतापुर जिले के एक गांव में है। मान्यता यह है की पुराणों की रचना महर्षि व्यास ने इसी स्थान पर की थी। यह वह जगह है, जहां पर पहली बार सत्यनारायण की कथा हुई थी। ऐसा भी कहा जाता है कि नैमिषारण्य का यह नाम नैमिष नामक वन की वजह से रखा गया है। इस जंगल का भी बड़ा महत्व है। इसके पीछे कहानी ये है कि महाभारत के युद्ध के बाद साधु-संत जो कलियुग के प्रारम्भ के विषय में अत्यंत चिंतित थे, वे ब्रम्हा जी के पास पहुंचे। कलियुग के दुष्प्रभावों से चिंतित साधु-संतों ने ब्रम्हा जी से किसी ऐसे स्थान के बारे में बताने के लिए कहा जो कलियुग के प्रभाव से अछूता रहे। ब्रम्हा जी ने एक पवित्र चक्र निकाला और उसे पृथ्वी की तरफ घुमाते हुए बोले कि जहां भी यह चक्र रुकेगा, वहीं वह स्थान होगा जो कलियुग के प्रभाव से मुक्त रहेगा। संत इस चक्र के पीछे पीछ...

लखनऊ मेट्रो

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                               भारत देश मे जनसंख्या के मामले में सबसे बड़े राज्य का दर्जा प्राप्त उत्तर प्रदेश ने किया है |और कई प्रदेशों की राजधानी में मेट्रो का सफल संचालन के बाद अब हमारे प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मेट्रो का  कार्य तीव्र गति पर है |पिछली सरकार ने अपने कार्यकाल में करीब आठ किलोमीटर का कार्य पूर्ण करवाकर इसका शुभारंभ कर दिया| और अभी इसका ट्रायल चल रहा है |मेट्रो के कार्य के कारण लोगो को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है| जिसके कारण लोग ड्यूटी जाने में देरी हो रही है| ड्यूटी पर देर न हो उन्हें समय से पहले घर से निकलना पड़ रहा है|बच्चो को समय पर स्कूल पहुचे इसलिए समय से पहले लेकर जा रहे है लोग| पर यह हमारे भविष्य के लिए एक बेहतर और सुगम संसाधन बन कर तैयार हो रहा है मेट्रो के आने ट्रैफिक पूर्णतया सुविधा जनक हो जाएगा | और जिससे हमारे शहर में प्रदूषण नामक जहर को कम किया जा सकेगा |मेट्रो के कार्य के कारण उस रूट पर ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है जिससे गरीब परिवार जो फुटपात पर सब्जिय...