विकास के नाम पर सिर्फ कंक्रीट

आज विकास का नाम सिर्फ कंकरीट पर ही आधारित हो गया है अगर काम कंकरीट का किया तो ही विकास है नही तो विकास नही मानते है लोग|आज की तारीख में विकास की परिभाषा सिर्फ और सिर्फ कंकरीट ही हो गया है जैसे रोड़े पक्की हो चाहे उसके लिए क्यो न पेड़ काटने पड़े कोई फर्क नही पड़ता है ऐसा मान कर चलने वाले लोग अगर ऐसे ही आगे बढ़ते रहे तो वो दिन दूर नही की लोग शुद्व हवा के लिए तरसने पर मजबूर होंगे  कंक्रीट पर बस रहे  शहरो का हल अब ये अपने दर्द को बयां कर रहा हसि वह पर रहने वाला कोई भी व्यकित स्वस्थ नही है इसका सबसे बड़ा कारण कृटिम वस्तुओ से परिवेश को डेवलपमेंट कर रहे है जिसके कारण शहरो का टेम्प्रेचर दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है और तरह तरह की बीमारियों को दावत देता जा रहा है शाम को चलने पर आज से 6-7 पहले लखनऊ शहर की सड़कों पर चलने शीतल हवा का अनुभव सबसे अलग नजारा देता था  पर अब शाम को निकलने पर गर्म हवा मिलती है साथ ही साथ धूल भी जिसके कारण अस्थमा जैसी बीमारियां 5-6 साल के बच्चे भी ग्रसित हो गए है शहरो में अब सिर्फ कंक्रीट ही दिखाई पड़ती हर तरह पेड़ पौधे नही इसका जीत जगत उदाहरण लखनऊ का घंटाघर है कभीकरीब 2,-3 साल पहले यह पर अमरख जंगलजलेबी आंवला और चंदन के पेड़ हुआ करते थे जिसके कारण शसम का माहौल काफी खुशनुमा होता था पर अब सिर्फ विकास के नाम पर इन पेड़ों को काट कर वह पर चारो तरफ कंक्रीट के पत्थरो को लगा दिया गया है जिसके कारण वह का तापक्रम बहुत ही गर्म हो गया है ऐसे ही बहुत ही जगहे जहा पर पेड़ो को काट कर वहाँ पर कंक्रीट के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है आप को मालूम हो कर ताज्जुब होगा कि हमारे जीवन में बहुत ही महत्वपुर्ण भूमिका पेड़ो की है अगर ये नही होगी तो हम लोग तड़प तड़प कर मरने पर मजबूर हो जायेगे पर आज के जीवन मे सिर्फ विकास के नाम पर हम कंक्रीट के  पत्थरो को विकास मानते है ऊँची ऊँची इमारते बनाने में हम लगे है और पेड़ो की तरफ ध्यान नही करते है यदिबम अच्छा जीवन व्यतीत करना है तो 33% जंगल होना चाहिए पर वर्तमान समय मे हमारे पास सिर्फ 12-13 % ही जंगल है औऱ हम टैब भी जंगलो को बचाने में कोई एंड्रेसस्ट नही दिख रहे है हमे इस पत्थर के विकास को रोकने होगा कंक्रीट का फार्मूला जानकर आप मभी सकते आ जायेंगे की कंक्रीट जल्दी से गर्म हो कर देर से ठण़ठी होती है और इसका प्रभाव ग्लेशियर पर बहुत तेजी के स्टब पड़ रहा है फिर भी इस मुद्दे पर सरकार कोई बात नही कर रही है कि व्यकित के जीवन को निरोगी बनाने में और विलुप्ति हो रही पशु पंछियो को बचाया जा सके |

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