प्रकित का विनाश करने में मुख्य कारक मनुष्य
आज जिस तरह से प्रकित का विनाश हो रहा है उसका जिम्मेदार मनुष्य ही है आज अपनी मूलभूत सुविधाओं के लिये जिस तरह से प्रकित को नुकसान पहुचाया जा रहा है उसका परिणाम धीरे धीरे दिखाई पड़ने लगा है लगातार पेड़ो का कटान करके जगलो का विनाश किया जा रहा है उससे होने वाले नुकसानों को शायद मनुष्य ने अभी तक समझ ही नही पाया है जिससे उस को रोक कर प्रकित के नुकसान को रोक जा सके लगातार हो रहे जगलो के कटान के कारण जंगली जानवर बस्तियों की तरफ निकल कर बाहर आ रहे है ऐसी घटनाएं आये दिन हो रही है जिसके कारण ग्रामीण गावो में लोगो के अंदर डर बना हुआ है जगलो के कटान के कारण मौसम में तेजी से परिवर्तन हो रहा है कई प्रकार के जीव जन्तु पंछियों की प्रजाति विलुप्त होती जा रही है क्योंकि जीव जन्तुओं और पंछियो का घर या बसेरा जंगल मे होता है पर आज के समय मे जंगलो को बहुत तेजी से काट कर खत्म किया जा रहा है जिसके कारण ये बहुत से जीव जंतुओं और पंछियों की प्रजातिया विलुप्ति की कगार पर खड़ी है ऐसी कारण प्रकित में बहुत तेजी से बदलाव हो रहा है जिसके कारण बारिश न होने के कारण जलस्तर तेजी से गिर रहा है बुजुर्ग लोगो का मानना है कि यदि ऐसा ही रहा तो धरती का विनाश जल्द ही हो जाएगा समय पर बारिश न होने के कारण फसलो की पैदा वार दिन पर दिन कम होती जा रही है और अगर ऐसा ही रहा तो जल्द ही बंजर में बदल जाएगी जैसे बुंदेलखंड हो गया | अगर इसको बचाना है तो इसके उपायो पर तेजी के साथ ध्यान देना होगा | लगातार गायब हो रहे बॉस के जंगलों को बचाना होगा और बंजर भूमि पर नए जंगल तैयार करने होंगे |बुजुर्गो का मानना है कि बॉस बादलो को रोककर बारिश करवाने में बेहद सछम होते है और यू के लप्ट्स के पेड़ों पर रोक लगनी होगी क्योंकि यू के लपट्स पृथ्वी से करीब 50-60 फिट नीचे से पानी खीच लेता है और बॉस बादलो को रोककर बारिश कराने में सछम होते है इसलिए यदि प्रकित को बचना है और विलुप्त हो रहे जीव जन्तुओं और पंछियो की प्रजातियों को बचाना है तो बॉस के जंगल & जंगल तैयार करने होंगे जिससे प्रकित को बचाया जा सकता है
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