बचपन : रह गयी बन कर यादे
वो भी क्या दिन हुआ करते थे जब हर तरफ से खुशहाली ही खुशहाली हुआ करती थी सोचने के लिए सिर्फ एक बात की आज खेलना क्या है और कौन कौन आज नही है तो उसकी कमी उस खेल में सिर्फ दिखती थी बचपन का वो जीवन कितना अच्छा होता है उस का अब सिर्फ एहसास ही बचा है वो भी क्या दिन थे जब सब मिलकर नए नए आविष्कार किया करते थे तरह तरह के खेलो के | मानो अब की तो कुछ हो ही नही पता है ना वो दोस्त रहे और न वो अब हम जिंदगी की दौड़ में अब सब खो से गया है बचपन के जब खेल याद आते है तो बस आँखों मे पानी आ जाता है जैसे हैम लोगो की टोली हुआ करती थी शाम होते ही सब एक जगह इक्कट्ठा होकर खेल खेलतें थे मानो समय ही काम पड़ जाता था कभी कभी में वो लड़ाई आज भी वैसी ही याद आ जाती है जब हम लोग छुपन छुपाई,क्रिकेट,कंचे ,लंबी दौड़, सियर आदि खेल हुआ लड़ते थे बचपन मे सिर्फ दो ही काम एक खेल दूजा पढ़ाई होती थी आज की तरह से जीवन मे तब कोई छह नही हुआ करती थी खेल में बेईमानी की जगह सर्वोपरि होती थी जब हारने लगो तो सिर्फ वो ही रक रास्ता अपनाते थे टी वी सीरियल की तरह लोग की आवाज निकलना दूरसे व्यक्तियों कापी करना सबसे अच्छा लगता था आज जा तो जीवन ही बदल गया है ना वो पुराने दोस्तों से अब मुलाकात हो पाती है और न ही बात | अब जब गांव में उन जगहों को देखते है तो उन दिनों की याद आ जाती थी छोटी छोटी बात में लड़ाई करना और तब एक ही बात जानते थे जब हम दूर होंगे तो मेरी याद बहुत आएगी तब सोचोगे की बार मिल लू पर ये तब ये बहुत मुश्किल होगा | मानो की ये सही होगा ये नही मालूम था अब सोचता हूं कि काश उन दोस्तो से फिर मुलाकात हो जाये और उनसे ज्यादा से ज्यादा समय साथ मे गुजार लिया जाए |अब उन पुराने दोस्तों से तो फेसबुक और वाट्सएप पर ही बात हो पाती है आज के दिन उन दिनों की याद करके सोचता हूं कि तब तो कोई टेंसन ही नही थी कि क्या करना है और क्या नही आज की भाग दौड़ किजिन्दगी में फुरसत ही कहा जो उन दिनों की तरह से जिया जाए बस अब ये सोचने में ही वक्त चला जाता है कि अगर सुबह काम पर नही गए तो काम हाथ से चला न जाये| आज के वक्त में और तब के वक्त में बहुत ही दूरगामी अंतर हो गया है आज दीर्फ़ कमाने की होड़ है और तब के वक्त में बहुत ही अंतर हो गया है तब जो 1-2 रुपये मिलते थे उसमे भी खर्च बहुत आसानी से चल जाता था आज 1-2 हजार में भी नही चल पाता अब कल के बारे में सोचना पड़ता है तब ऐसी कोई बात ही नही थी बस जो मिला उसे सिर्फ खर्च करने की ही होड़ हुआ करती थी मानो उनको खर्च कर लिया तो कोई बहुत बड़ा तीर मार लिया आज जितना भी कमा लो वो उतना ही कम है
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